Galwan Valley चीन को सबक सिखाने का समय-

Galwan Valley चीन को सबक सिखाने का समय

Galwan Valley -चीनी सेना ने लद्दाख में जिस तरीके से खूनी खेल खेला है उसे आत्‍मसात करते हुए अब समय आ गया है कि चीन को इस हरकतो को माकूल जबाब दिया जाये ।

चूंकि चीन की सैनिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसके दोनो स्थि‍तियों पर कुराघाट हमला करना चाहिए । जहा एक तरफ बिना युद्ध लड़े चीन की आर्थिक नीति‍यों पर हमला कर सकते है तो वही इस पर अमल करना शुरू कर देना चाहिए।

क्‍योकि किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आर्थिक शकित्‍ होती है अगर आप उस देश का नब्‍ज पकड़ना है तो उसके आर्थिक हितो पर वार किये जाने से अपने को दूर नहीं रखना चाहिए ।

अब यह समय आ गया है कि इस पर दुनिया के तमाम देशो को इस पर सोचने के जगह इसे अमल मे लाने की समय आ गया है । क्‍योंकि चीन एक विस्‍तारवादी सोच वाली देश है ।

उसे अगर अभी नहीं रोका गया तो एक समय एैसा आयेगा कि वह आप ही व्‍यापार से प्राप्‍त धन से आप को ही मुसिबत में डाल देगा । जैसे कि वर्तमान समय में पूरा दूनिया कोरोना से लड़ रहा है।

आत्‍म निर्भर होना जरूरी

भारत ने इसकी शुरूआत शुरू कर दी है । बीएसएनएल के 4 जी टेंडर से चीनी कंपनियों को बाहर रखने के फैसले के बाद कानपुर से मुगलसराय के बीच फ्रेट कॉरीडोर प्राजेक्‍ट में चीनी कंपनी का ठेका रद करने का फैसला

‘प्राप्‍त न्‍यूज पेपर दैनिक जागरण’ एक सही दिशा में उठाया गया सही कदम है। नि:सन्‍देह इस तरह का निणर्य लेना बहुत कठिन है पर यदि अब आप आत्‍म निर्भर नहीं बनेगे तो दूसरे देशो पर निर्भता का खामियाजा उठाना ही पड़ेगा।

यह कार्य कठिन तो जरूर है पर इतना भी कठिन नही कि हो नही सकता । हां यह जरूर है कि इसमे समय और इमानदारी दोनों की जरूरत पड़ेगी । लेकिन दृढ़ इच्‍छा हो तो  तो कुछ भी संभव है ।

Galwan Valley चीन को सबक सिखाने का समय
Galwan Valley चीन को सबक सिखाने का समय

बुहान से निकला कोरोना वायरस जहा बड़े बड़े देश को बर्बाद कर दिया है वही इसी भारपाई तो चीन को करना ही पड़ेगा । अमेरिका, जर्मनी,जापान, ऑस्‍ट्रेलिया समेत कई देश चीन के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना चूंके है ।

भारत को भी इस अंतराष्‍ट्रीय अभियान का हिस्‍सा बन कर चीन की आर्थिक स्थितियों पर हमला करने से पीछे हटना नही चाहिए ।

टेंडर से चीन की कंपनियों को अलग रखने की तैयारी 

भारत सरकार चीनी कंपनियो को टेंडर लेने से दूर रखने के लिए कुछ नियमो में बदलाव करने जा रही है । अब नियमो में इस तरह का बदलाव किया जायेगा कि सिर्फ वही कम्‍पनी टेंडर में हिस्‍सा ले सकेगी जिनके पास भारत में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग  सुविधा हो

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और उनका भारत में सर्विस नेटवर्क हो जिसमे 80 प्रतिशत वहां के स्‍थानीय लोगों की हिस्‍सेदारी हो ।चूंकि विश्‍व व्‍यापार संगठन के नियमों को देखते हुए ग्‍लोगल टेंडर  में किसी देश को हिस्‍सा लेने से सीधे तौर पर मना नहीं किया जा सकता है

ऐसे में विभिन्‍न प्रकार के शर्तो को लगाकर किसी भी देश को रोका जा सकता है चाहे वह कोई देश क्‍यों न हो ।

चीन को रेलवे ने दिया पहला बड़ा झटका 

दैनिक जागरण समाचार पत्र से प्राप्‍त सूचना के आधार पर भारतीय रेलवे ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईर्स्‍टन फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्‍ट से चीन की कंपनी का ठेका रद करने का फैसल लिया है ।

चीनी कंपनी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है । चीन की बीजिंग नेंशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्‍टीट्रयूट आफ सिगनलिंग एंड कम्‍यूनिकेशन ग्रुप कंपनी रेलवे के ईर्स्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्‍ट में

कानपुर से दीन दयाल नगर (मुगलसराय) के बीच 417 किमी की दूरी में सिगनल लगाने का काम कर रही थी । यह 471 करोड़ का ठेका जून 2016 ममें दिया गया था । चार साल बीत जाने के बाद भी कंपनी ने केवल 20 फीसद कार्य ही पूरा किया है ।

 

 

 

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