Arvind Kejriwal Chief Minister of Delhi

Arvind Kejriwal Chief Minister of Delhi

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

 

Arvind Kejriwal Chief Minister of Delhi

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अरविन्‍द्र केजरीवाल का जन्‍म एक शिक्षित परिवार में हरियाण के भिवानी जिले में 16 अगस्‍त  1968 को हुआ था। उनके पिता का नाम गोविंद राम था जो एक पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और उनकी माता का नाम गीता देवी है ।  उनकी शिक्षा हिसार के कैंपस स्‍कूल और सोनीपत के एक ईसाई मिशनरी होली चाइल्‍ड स्‍कूल में हुई । उनका अंधिकाश जीवन गाजियाबाद, सोनीपत तथा हिसार में बिता । उन्‍होने ने भारतीय प्रोद्योगिकी संस्‍थान खड़गपुर से स्‍नातक किया और वे सऩ् 1989 में टाटा स्‍टील में नौकरी कर रहे थे। नौकरी करते समय से ही केजरीवाल ने 1992 में सिविल सेवा परीक्षा में अध्‍ययन के लिए छुट़टी ले ली थी और इस दौरान उन्‍होंने सिविल सेवा परीक्षा के माध्‍यम से अर्हता प्राप्‍त करने के बाद 1995 में भारतीय राजस्‍व सेवा (IRS) में सहायक आयुक्‍त के रूप में शामिल हुए । फरवरी 2006 में उन्‍होने जनता की सेवा करने के उद़देश्‍य से संयुक्‍त आयुक्‍त पद से इस्‍तीफा दे दिया।

भ्रष्‍टाचार विरोधी सक्रियता –

Andolankarta se Chief Minister tak
Andolankarta se Chief Minister tak

आयकर विभाग के साथ सेवा करते हुए केजरीवाल सरकारी विभागो में फैले हुये भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने के उदृदेश्‍य से जनता की सेवा करने के लिए उन्‍होनें ने मनीश सिसोदिया और उनके अन्‍य साथी के साथ  उन्‍होने परिवर्तन नामक एक आंदोलन चलाया।  केजरीवाल ने  परिवर्तन नामक एक आंदोलन को चलाने के लिए जनवरी 2000 में नौकरी से इस्‍तीफा दे दिया।

परिर्वतन –

परिर्वतन एक पंजीकृत एनजीओ था जिसके माध्‍यम से सार्वजनिक वितरण प्राणाली, सार्वनजिक कार्यो, सामाजिक कल्‍याण योजनाओं तथा आयकर तथा बिजली से संबधित नागरिको की शिकायतो से संबधित था। इस एनजीओ में काम करने वाले लोगों को दैनिक वेतन व्‍यक्तिगत दान पर चलता था।

कबीर –

2005 में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने मध्‍युगीन दार्शनिक कबीर के ना से एक पंजीकृत गैर सरकारी संगठन का शुभारंभ किया । कबीर भी परिर्वतन जैसा ही काम करने के उद़देश्‍य से संबधित था। कबीर मुख्‍य रूप से मनीष सिसोदिया द्वारा संचालित था।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार –

अन्‍ना हजारे, अरूणा रॉय और शेखर सिंह जैसे अन्‍य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ केजरीवाल को राष्‍ट्रीय स्‍तर के सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में अभियान में एक महत्‍वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में मान्‍यता दी गई । उन्‍होने फरवरी 2006 में अपनी नौकरी से इस्‍तीफा दे दिया और उस साल बाद में उन्‍हें पेरिवार्टन के साथ जुड़ने के लिए इमर्जेंट लीडरशिप के लिए रेमन मैग्‍सेसे पुरस्‍कार दिया गया। पुरस्‍कर ने उन्‍हें जमीननी स्‍तर पर आरटीआई आंदोलन को सक्रिय करने और भष्‍ट्राचार से लड़ने के लिए नई दिल्‍ली के गरीब नागरिकों को सशक्‍त बनाने के लिए मान्‍यता दी।

पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन –

दिसंबर 2006 में केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया और अभिनंदन सेृी के साथ्‍ मिलकर दिसंबर 2006 में पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन की स्‍थापना की तथा कोष के रूप में रेमन मैग्‍सेस पुरस्‍कार में मिली पुरस्‍कार की राशि को दान कर दिया तथा ये तीन संस्‍थापको के अलावा प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने फाउंडेशन के ट्रस्‍टी के रूप में काम किया। केजरीवाल ने आयकर विभाग, दिल्‍ली नगर निगम, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और दिल्‍ली विद्युत बोर्ड सहित कई सरकारी विभागो में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के मामलो में RTI  अधिनियम का उपयोग किया । सन् 2010 में केजरीवाल ने राष्‍ट्रमंडल  खेलों में भ्रष्‍टाचार के खिलाफ विरोध किया ।

इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन (IAC) समूह का गठन –

अरविन्‍द्र केजरीवाल ने अन्‍ना हजारे मनीष सिसोदिया तथा किरण बेदी तथा अन्‍या साथियों के सहयोग से इंडिया अगेंस्ट करप्‍शन समूह का गठन किया । इस समूह का गठन करने का मुख्‍य उदृदेश देश में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार पर लगाने के लिए एक मजबूत लोकपाल बनवाने के उदृदेश से संबधित था जो 2011 में भारतीय भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन में विकसित हुआ ।

राष्‍ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन –

इस आंदोलन के जबाब में सरकार ने सलाहकार परिषद का गठन किया जिसने लोकपाल विधेयक का मसौदा तौयार किया । परन्‍तु परिषद द्वारा प्रस्‍तुत विधेयक की केजरीवाल और अन्‍य कार्यकर्ताओं द्वारा इस आधार पर आालोचना की गई थी कि इसमें प्रधानमंत्री, अन्‍य भ्रष्‍ट कार्यालयधारकों और न्‍यायपालिका के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्‍त शक्तियां नही थी और लोकपाल के चयन की पक्रिया की पारदर्शिता पर भी आलोचना की ।

लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन –

सरकार के सलाहकार परिषद द्वारा प्रस्‍तुत मसौदा की आलोचना होने के कारण सरकार ने एक समिति की गठन किया । इस समिति में नागरिक समाज के प्रतिनिधि सदस्‍यों के रूप में अरविन्‍द्र केजरीवाल एक थे । अरविन्‍द्र केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इस समिति में उनका असमान स्थिति थी और सरकारी नियुक्तिया उनकी सिफारिशों की अनदेखी कर रही थी । सरकार ने तर्क दिया कि कार्यकर्ताओं को विरोध के माध्‍यम से निर्वाचित प्रतिनिधियों को ब्‍लैकमेल करने की अनुमति नही दी जा सकती है । केजरीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधियों को तानाशाही की तरह काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है ।

IAC  कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन तेज –

इस पर IAC कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन तेज हो गया और अन्‍ना हजारे सहित केजरीवाल ने भूख हड़ताल शुरू कर दिया । इस पर अन्‍ना हजारे को पुलिस हिरास्‍त में ले लिया गया । आंदोलन को बढ़ते देख सरकार ने अगस्‍त 2011 में सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच समझौता हुआ । जनवरी 2012 तक सरकार एक मजबूत जन लोकपाल को लागू करने के अपने वादे से पीछे हट गई ।

राजनीतिक कैरियर –

आम आदमी पार्टी (AAP )  का गठन –

केजरीवाल ने एक मजबूत जन लोकपाल बनाने के उद्देश्‍य से सरकार के पीछे हटने के कारण केजनीवाल तथा अन्‍य कार्यकर्ताओं ने राजनीति में प्रवेश करने और चुनाव लड़ने का फैसला किया । सन् नवंबर 2012 में उन्‍होंने औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी का शुभांरभ कर चुनाव लड़ने का फैसला किया । केजरीवाल को सर्वसम्‍मति से पार्टी का राष्‍ट्रीय संयोजक चुना गया । इस पार्टी के गठन के बाद अन्‍ना हजारे से केजरीवाल के बीच में एक दरार पड़ गयी।

Lokpal से भ्रष्‍टाचार पर अंकुश, भ्रष्‍चारी जेल जाने को रहे तैयार 

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री (पहला कार्याकल) –

2013 में पार्टी ने सभी 70 सीटो के लिए दिल्‍ली विधान सभा चुनाव लडा । जिसमे उनकी पार्टी 28 सीटो के साथ तथा 8 आई एन सी विधायको तथा 01 जनता दल  और 01 निर्दलीय विधायको के बाहरी समर्थन से त्रिशंकु विधानसभा में अल्‍पसंख्‍यक सरकार का गठन किया और दिसंबर 2013 को दिल्‍ली के दूसरे सबसे युवा मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली।

मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा –

Arivend Kejriwal शपक्ष लेने के बाद ही 14 फरवरी 2014 को उन्‍होने दिल्‍ली विधानसभा में जन लोकपाल विधेयक को पेश करने में विफल रहने के बाद मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया। उन्‍होने  भ्रष्‍टाचार विरोध  कानून को रोकने के लिए भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को यह दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया गया कि उन्‍होने रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के अध्‍यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के सरकार के फैसले से जोड़ा ।

2014 का आम चुनाव –

केजरीवाल ने 2014 में हुये लोकसभा के चुनाव में वाराणसी से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़े जिसमे उनकी पराजय हुई ।

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री (दूसरा कार्याकल) –

Arivnd Kejriwal  के नेतृत्‍व में 2015 में दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटो पर जीत हासिल कर 14 फरवरी 2015 को रामलीला मैदान में दूसरी बार दिल्‍ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। और उनकी पार्टी के कुछ मतभेदो के साथ जन लोकपाल विधयेक को विधान सभा में पारित किया । जो अभी तक लागू नही हो सका । मुख्‍यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा पर सबसे ज्‍यादा काम करने पर जोर दिया ।

मोहल्‍ला क्लिनिक –

केन्‍द्र सरकार से लगातार खराब रिस्‍तो के बावजूद भी केजरी वाल ने दिल्‍ली में प्रत्‍येक मोहल्‍ला किलनिक शुरू किया जिसमे फ्री में इलाज और संबंधित बिमारी का टेस्‍ट और दवाये फ्री कर दिया गया है । जिसका लाभ दिल्‍ली के सभी लोग ले रहे है । उन्‍हाने दिल्‍ली में पानी की समस्‍या को काफी हद तक सही कर दिया है तथा उसमें भी फ्री पानी देने का भी प्रावधान बना दिया गया है । बिजली के मामले में उन्‍होने 200 यूनिट तक की बिल माफ कर दिया है । उन्‍होने जनहित जैसे बहुत से ऐसे काम किये है जिसकी जितनी प्रसन्‍नता की जाये वह कम होगी । शिक्षा पर उन्‍होने दिल्‍ली में एक क्रांति ला दिया । उनके इस कामो की चर्चा पूरे दुनिया मे हो रही है। जिसका एक उदाहरण अभी हाल ही में ट्रंप के भारत आगमन पर उनकी पत्‍नी ने दिल्‍ली के हैपीनेस क्‍लासो को देख्नने आयी थी और कही थी कि इस तरह की क्‍लासेस पूरे दुनिया में चलाई जाये।

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री (तीसरा कार्याकल) –

फरवरी 2020 में हुए दिल्‍ली विधान सभा की चुनाव में अरविन्‍द्र केजरीवाल को हुये 67 सीटो में केजरीवाल की आप पार्टी को 62 सीटे मिली और वे दिल्‍ली के लागातार तीसरे मुख्‍यमंत्री बने । इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को महज 8 सीटे ही मिल सका ।

 

 

 

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