बीजिंग – शंघाई कैसे बच गए – ट्रेड वार या आपदा

बीजिंग – शंघाई कैसे बच गए – ट्रेड वार या आपदा

बीजिंग – शंघाई -पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस ने तीन तरह से पूरे दूनिया में तबाही मचा रखी हुयी है पहला पूरे वैश्विक मानव पर खतरा तथा साथ ही साथ पूरी अर्थव्‍यवस्‍था पर करारा हमला के साथ-साथ पूरे दूनिया को आर्थिक मंदी में ढकेलते हुए ऐसा प्रतीत होता हुआ दिखाई दे रहा है। इस वायरस के हमले से जहां पूरा दूनिया पर खतरा मंडरा रहा है वही सुपर पावर कहे जाने वाले देश इसके सामने घुटने टेकते हुए नजर आ रहे है।

कोरोना वायरस ट्रेड वार या आपदा
कोरोना वायरस ट्रेड वार या आपदा

क्‍या यह वायरस प्राकृतिक वैश्विक आपदा है या ट्रेडवार है ?

दूनिया भर के जानकारो का मामना है कि यह वायरस वैश्विक आपदा के आड में कहीं ट्रेडवार तो नही ? जो वायरस चीन के वुहान शहर में भारी तबाही मचाने के बाद दुनिया के बडे़ बड़े देशो में जो तबाही मचा रही है जिनकी दूरी चीन से हजारो हजार किलोमीटर दूरी पर स्थित हे लेकिन चीन के वुहान शहर से चंद 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शंघाई और बीजिंग में इस वायरस का रूख व प्रभाव देखने तक को नहीं मिलता । एैसा क्‍यों ? पूरे मिडिलिस्‍ट देशो में सिर्फ इर्रान और इजराइल ही इस वायरस के चपेटे में है वहीं दक्षिण कोरिया इस वायरस का शिकार हो जाता है पर चीन के पडोसी देश इस वायरस से पूरी तरह से अछूता रहता है। इस सभी प्रश्‍न इस ओर इशारा नहीं करते है कि कही वैश्विक महामारी के पीछे ट्रेड वार तो नही।

 

क्‍या चीन के मित्र देशो में वायरस का प्रभाव कम देखने को मिल रहा है ?

 

इटली, स्‍पेन, जर्मनी, ब्रिेटेन, अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, भारत, इर्रान दूनिया के ये बडे देश जैसे यूरोप के इटली, स्‍पेन, जर्मनी और ब्रिटेन का दबदबा जबकि अटलांटिक देशो के अमेरिका, कनाडा का दबदबा और मिडिलिस्‍ट में इजराइल और इर्रान की पकड वही ऐशियाई देशों में भारत और जापान जो पूरी दुनिया की दशा और दिशा तय करते है इस वायरस से ग्रस्‍त है और  इस वैश्विक महामारी से लड़ रही है। वही दूसरी तरफ नजर डाले तो देखेगे कि चीन के मित्र देश रूस एवं उत्‍तर कोरिया में वायरस का प्रभाव का असर ना के बराबर है । जहाँ चीन के वुहान शहर में तबाही मचाते हुए करीब 3300 लोगों की जान लेते यूरोप के बहुत देशो में तबाही मचा रहा है जबकि वुहान शहर से कुछ किलो मीटर की दूरी पर होते हुए मित्र देशो में इस असर का प्रभाव देखने को नही मिल रहा है।

अगर इन कुछ देशो के आकड़े देखे तो इस बारे में बहुत सारे प्रश्‍न सोचने पर मजबूर कर देते है निम्‍न संक्रमण और मौते के आकड़े प्रकाशित समाचार पत्रो के माध्‍यम से दैनिक जागरण के माध्‍यम से प्राप्‍त । ये आकड़े घट बढ़ सकती है –

देश                         वुहान से दूरी लगभग                    लगभग संक्रमण                    मौते

चीन (वुहान)                                                                     81,589                         3300

इटली                     8659 किलो मीटर                            1,10,574                         13,155

स्‍पेन                     9859 किलो  मीटर                            1,10,238                         10,003

जर्मनी                    8279 किलो मीटर                              80,641                           962

अमेरिका               11859 किला मीटर                            2,15,362                          5,113

भारत                     3695 किलामीटर                                 2331                             73

वही ब्रिेटेन की वहुान से दूरी 8777 किलामीटर, वुहान से कनाडा की दूरी 9628 किलामीटर, वुहान से जापान की दूरी 2301 किलोमीटर है वही दक्षिण कोरिया की दूरी 1382 किलोमीटर तथा इजराइल से इसकी दूरी 7399 किलोमीटर तथा इर्रान की दूरी 5667 किलामीटर है

चीन के वुहान के बाद इस वायरस से ज्‍यादा तबाही सबसे कम दूरी पर स्थित दक्षिण कोरिया जबकि सबसे ज्‍यादा दूरी पर स्थित अमेरिका है जो चीन के वुहान से करीब 12 हजार किलोमीटर की दूरी होने पर भी मौते के आकड़े चीन के वुहान से आगे निकल चुके है या यह कहे कि यह आकंडा आग की ओर बढ़ रहे है जबकि चीन के वुहान शहर करीब चंद 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शंघाई और बीजिंग इस वासरस का प्रभाव नहीं देखा जा रहा है।

 

घुटने टेकते हुए वैश्विक आर्थिक एंव राजनीतिक केन्‍द्र –

इटली, स्‍पेन, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, भारत, इर्रान दूनिया के ये बडे देश जैसे यूरोप के इटली, स्‍पेन, जर्मनी और ब्रिटेन का दबदबा जबकि अटलांटिक देशो के अमेरिका, कनाडा का दबदबा और मिडिलिस्‍ट में इजराइल और इर्रान की पकड वही ऐशियाई देशों में भारत और जापान पूरी दुनिया की वश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक केन्‍द्र पर अगर गौर किया जाये तो इन देशो के नेता अपने नागरिको की जान बचाने के लिए इस वैश्विक महामारी से जूझ रहे है जो दुनिया के पूरी इकॉनमी को बर्बाद करने पर आमादा है । वही प्रश्‍न यह उठता है कि चीन में बीजिंग जो वुहान से मात्र 1100 किलोमीटर  व शंघाई  से मात्र 839 किलोमीटर पर स्थित है खुले क्‍यो है ? और इस वायरस का प्रभाव ना के बराबर क्‍यो है तथा रूस से इसकी दूरी महज 3500 किलोमीटर है तथा उत्‍तर कोरिया से तो इसका बार्डर सटा हुआ है वुहान से इसकी दूरी लगभग 1600 किलामीटर है। वहा इसका असर ना के बराबर देखने को मिल रहा है ।

 

क्‍या कोरोना चीन के लैब से निकला वायरस या फिर बायोलिजिकल वेपन?

 

तो क्‍या इसके पीछे कारण यह है कि कहीं चीन का शंघाई एंव बीजिंग वह शहर है जहां चीन के बडे नेता तथा सैन्‍य  के प्रमुख कामान्‍डरो का घर तथा दफ्तर है जहां चीन के कोइ्र नेता को संक्रमण तक नही होता जहा वुहान को छोड़ किसी भी जगह लाकडाउन भी नही हुआ था और न ही उनके बार्डर आपस में बंद थे। जबकि चीन से हजारो हजार किलोमीटर दूर स्थित देशो के प्रमुखो, मंत्रियो, स्‍टार, राष्‍ट्रध्‍यक्षो  की म़त्‍यु हो जाती है यह एक सोचनीय और अचरज कर देने वाला प्रश्‍न  है।

तो कही ऐसा तो नही कि शंघाई जो चीन की अर्थव्‍यवस्‍था को चलाता है जो चीन की आर्थिक राजधानी है जहां चीन के अर्थ्‍व्‍यवस्‍था को चलाने वाले लोग रहते है tgkजहां लाकडाउन भी नहीं किया जाता वहा वायरस किसी को भी संक्रमण तक नहीं करता है। तो मान लिया जाये कि दूनिया भर के जानकार कह रहे है कि क्‍या कोरोना चीन के लैब से निकला वायरस या फिर बायोलिजिकल वेपन है।

 

दूनिया के आर्थिक नक्‍शे पर कोरोना का प्रभाव

कोरोना वायरस से दूनिया भर में अर्थव्‍यवस्‍था पर मची कोहराम से दुनिया के शेयर र्माकेट क्रैस होने लगे है तमाम आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ गयी है। अमेरिका डालर के मुकाबले चीनी युआन अचानक मजबूत होने लगा है, चीन में अमेरिकी और यूरोपियन कंपनी के शेयर 40 प्रतिशत तक गिर रहे हे इसे चीन यूरोप और अमेरिकी कपनियो के शेयर 30 प्रतिशत से भी कम कीमत पर खरीद रहा है कैसे अचानक चीन में कोरोना के मरीजो और मौतो पर लगाम लगनी शुरू हो जाती है ? कैसेट जब पूरी दुनिया का प्रोडक्‍शन बंद हो जाता है तो तब अचानक चीनी मालो का डिमांड बढ़ जाती है।

महामारी नहीं एक जंग –

जानकारो का मानना है कि यह महामारी नहीं है एक जंग है जो अमेरिकी एंव उसके सहयोगी देशो से चीन इस वायरस के आड़ मे लड़ रहा है। यह वही चीन हे जिसे आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोलान्‍ड ट्रंप कमजोर करने के लिए कूटनितिक तरीके से खेल रहे थे और अब हालात यह है कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली राष्‍ट्र अमेरिका आज अपने घुटने पर खड़ा है और उसे यह समझ नही आ रहा है कि उसे इस मुसीबत से कैसे निपटे । क्‍यो चीन मित्र देशो में जैसे रूस और उत्‍तर कोरिया में केस कम है और इन देशो के पड़ोस में रहने वाले देशो में वायरस तबाही मचाये हुए है। क्‍यो नहीं कोरोना ने यहा विकराल रूप नहीं दिखाया, जैसा कि अमेरिका एंव यूरोप देशो में देखने को मिल रहा है ?

बीजिंग – शंघाई
बीजिंग – शंघाई

क्‍या चीन ने इस बीमारी से इलाज खोज लिया है ?

जब दुनिया भर के डॉक्‍टर इस बीमारी का इलाज ढूढ़ रहे है तब चीन ने इस वायरस पर कैसे काबू पा लिया है आखिर चीन ने इस बीमारी का ऐसा क्‍या इलाज खोज लिया जो बाकी दुनिया के देश नही कर पर रहे है। और कैसे चीन के वुहान को भारी तबाही के बाद उसे खोलना और वहां पर  व्‍यापार करना शुरू कर दिया है यह सभी घटनाये दुनिया भर के जानकारो को अचरज में डाली रही है।

अगर एक लम्‍हे में मान ही लिया जाय और इसे चीन और अमेरिका के ट्रेड वार से देखा जाये तो हमे यह समझने की जरूरी होगी कि इस लड़ाई में किसकी फायदा नजर आ रहा है। क्‍या चीन को इसका फायदा हो रहा हे ? अगर देखा जाय तो जिस तरह से कोरोना वायरस अमेरिकी और यूरोपियन देशों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा हे और जिस तेजी से चीन अमेरिका और यूरोपियन कंपनियों के शेयर खरीद रहा है उससे अमेरिका अर्थव्‍यवस्‍था ढ़ह सकता है । अगर अमेरिका की इकॉनमी अगर तबाह हुयी तो चीन विरोधी डोनाल्‍ड ट्रंप के लिए अगला चुनाव जीत पाना मुश्किल होगी । और अगर इस महामारी के दौरान चीन ने दुनिया के बड़ी कंपनियों के शेयर खरीद लिए तो विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था को नियंत्रित कर सकेगा और अगर एक पल मान भी लिया जाय कि अमेरिका व यूरोपियन देशों के खिलाफ यह चीन का ट्रेडवार है तो फिर यह तबाही कब रूकेगी और कहां जाकर रूकेगा ।

जानकारो का मानना है कि चीन अमेरिका को सैन्‍य रूप से नहीं हरा सकता और जो मौजूदा हालात अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोलाल्‍ड ट्रंप चीन के लिए बना रहे है उसे चीन बर्दाश्‍त भी नही कर सकता है तो क्‍या इसके लिए ही कोरोना का विसात बिछाया गया है वरना इस आंकणो को देखने से यही प्रतीत होता है कि जिस वायरस से  अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था  एव रक्षा को पंगु बना दिया है और जिससे पूरी दुनिया घरो में कैद होने पर मजबूर हो गयी है और जो महामारी अपने चरम पर है तो जरा सोचिये ऐसे समय में चीन के वुहान शहर में फैले कोरोना वायरस द्वारा मचाई तबाही पर कैसे पकड़ बना लिया कि बुहान में फिर से शहर खुल गया तथा वहा से ट्रेड शुरू हो गया है ।

तो क्‍या एैसा माना जायेगा की चीन ने इसका टीका एन्‍टी डोज खोज लिया है मगर यह खुलासा करने और दूसरे देशो तक टीका पंहुचाने से पहले वह दूनिया के कूटनीतिक व आर्थिक समीकरणो को अपने हक मे बना लेना चाहता है। इस तरह जानकारो का मानना है कि चीन पूरी दुनिया के बिना किसी युद्ध लड़े अपना साम्राज्‍य पूरी दुनिया में फैला देगा और बैठे बैठे किसी भी देश की अर्थव्‍यवस्‍था को हिला सकता है तब तक चीन दुनिया में इस वायरस के जंग के नाम पर दुनिया को अपने मेडिकल उपकरण, मस्‍क, प्रोटेक्टिव सूट इत्‍यादि बहुत से सारे उपरकण बचेगा तथा दुनिया के देश अपने मूल्‍क के नागरिको को बचाने के लिए सरकारो को चीन से मदद लेनी पड़ेगी ।

 

भारत में कोरोना के खिलाफ साहसिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी –

भारत में कोरोना के खिलाफ लडाई में भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत ही सही समय पर साहसिक एव कठोर निणर्य लेकर दुनिया के देशो को यह उपदेश देने में कामयाब होते हुए दिख रहे है कि अगर समय पर सही कदम उठाया जाय तो दुनिया के किसी भी आपदा से आप लडा जा सकता है । भारत ने भी यह लड़ाई लडा जा रहा है जिसमे हद तक कोरोना को रोकने मे सफलता प्राप्‍त होते दिख रहा है । और पूरी दुनिया इस अजचरज में पडी हुयी है कि 130 करोड़ की आबादी होने के बावजूद सरकारे इसे रोकने में पूरी ताकत झोक दी है। वैसे भारत के प्रधानमंत्री कठोर और साहसिक कदम उठाने के लिए जाने जाते है।

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